वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 249 of 268

सबै अंग गुनहीन हौं, ताकौ जतन न कोई। एक किसोरी कृपा तैं, जो कछु होइ सु होइ॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृंदावन शत लीला (6) सब इन्द्रियाँ पापमय हैं, किसी को तुम्हारी चिन्ता नहीं। बस आपकी एक छोटी सी कृपा है, जो होता है सो होता है... - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (6)
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