वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 265 of 268

वृंदावन रस अति सरस है, कैसो करूँ बखान। जेहि आगे बैकुंठ को, फीको लागत पयान॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, आनंदाष्टक (8) वृन्दावन का रस बड़ा मधुर है, उसका वर्णन कैसे करूँ? जाहि आयु वैकुण्ठ को, फिको लगत पयन.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, आनंदाष्टक (8)
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