वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 264 of 268

वृंदावन प्यारो अधिक, यातें प्रेम अपार। जामें खेलती लाडली, सर्वसु प्राण आधार॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (38) वृन्दावन प्रिये, यतेन प्रेम अपार। जामेन खेलति लाडली, सर्वसु प्राण अधर.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (38)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि