वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 29 of 268
कुंज-कुंज अति प्रेम से, कोटि-कोटि रति मैन।
दिनहिं सँवारत रहत हैं, श्री वृंदावन ऐन॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (15)
मैं हर उपवन को बड़े प्यार से प्यार करता हूँ, मुझे हर बगीचे से प्यार है। दीना जारी है, श्री वृन्दावन ऐन.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (15)