वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 28 of 268

मन तौ चंचल सबनि तें, कीजै कौन उपाइ। साधन कौ हरि भजन है, कै सत्संग सहाई॥ - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (14) मन चंचल है, कोई उपाय नहीं। कौन सा हरि भजन साधन है, कौन सा सत्संग सहायक है.. - श्री ध्रुवदास जी, बयालिस लीला, मन शिक्षा लीला (14)
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