विपिन राज राजत दिनहिं

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 31 of 268

विपिन राज राजत दिनहिं, बरषत आनँद पुंज। लुब्ध सुगन्ध पराग रस, मधुप करत मधु कुंज॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (16) विपीन राज रजत दिनाहिन, बरषत आनंद पुंज। पराग की सुगन्धित सुगंध, मधु का रस, मधुवन... - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीलाएँ, वृन्दावन शत लीला (16)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि