वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 52 of 268
आदि अन्त जाकौ नहीं, नित्त सुखद बन आहि।
माया त्रिगुन प्रपंच की, पवन न परसत ताहि॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (25)
शुरू से अंत तक मत जाओ, हर दिन खुश रहो। माया त्रिगुण प्रपंच की, पवन न परसत ताहि.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन षट लीला (25)