वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 51 of 268

उपमा वृन्दाविपिन की, कहि धौं दीजै काहि। अति अभूत अद्भुत सरस, श्री मुख बरनत ताहि॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (24) वृंदाविपिन उपमा, कहीं उड़ा दो। अति अद्भुत अद्भुत रस, श्री मुख बरनत ताहि.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (24)
वृन्दाविपिन प्रणाम करिवृन्दाविपिन प्रणाम करि