वृन्दाविपिन प्रणाम करि

Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास

Verse 58 of 268

खान पान तौ कीजिये, रसिक मंडली माहिं। जिनकै और उपासना, तहाँ उचित ध्रुव नाहिं॥ - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (27) कृपया चिंता न करें, मैं एक रोमांटिक ग्रुपी हूं। जिनके लिए न आगे कोई पूजा है, न कोई उचित स्तंभ.. - श्री ध्रुवदास जी, बयालिस लीला, मन शिक्षा लीला (27)
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