वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 61 of 268
न्यारौ है सब लोक तें, वृन्दावन निज गेह।
खेलत लाड़िली लाल जहाँ, भींजे सरस सनेह॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (28)
सब लोक न्यारे, वृन्दावन निज गेहूँ। खेलत लड़ैली लाल जहाँ, भींजे सरस सनेह.. - श्री ध्रुवदास जी, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (28)