वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 62 of 268
रसिक रँगे जे जुगल रँग, तिनकी जूँठनि खाइ।
जहाँ तहाँ के पावने, भजन तेज घटि जाइ॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (28)
रसिक रेंज जे जुगल रेंज, एते तिनकी जुन्थानी। जहाँ भी तीर्थ हो, भजन तेज गति गति जय.. - श्री ध्रुवदास जी, बयालिस लीला, मन शिक्षा लीला (28)