लाड़िली-लाल बिलास करैं
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 81 of 268
लाड़िली-लाल बिलास करैं, रचि सेज सुदेस सुरंग सुहाई। [1]
मंदहि-मंद हँसैं रस-मत्त, भरे अनुराग महा छबि पाई॥ [2]
कोक-कलानि की घातनि माहिं, बिचित्र बिनोद बढ़ावत माई। [3]
सखी चहुँ कोद लतानि लगीं, निरखैं ‘ध्रुव’ प्राननिं देति बधाई॥ [4]
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, श्रंगार शत लीला (3.5)
लाडिली-लाल बिलास करिन, रचि सेज सुदेस सुरंग सुहाई। [1]. [3] सखी चहुँ कोद लतानि लोगिन, निरखें 'ध्रुव' प्राणनिन देति बधाई। [4] - श्री ध्रुव दास जी, बयालिस लीला, श्रृंगार शत लीला (3.5)