वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 82 of 268
विपिन अलौकिक लोक में, अति अभूत रसकन्द।
नव किसोर इक वैस द्रुम, फूले रहत सुछन्द॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (35)
विपिन एक अलौकिक पुरुष है, असाधारण व्यक्ति है। ऐसा ही एक ढोल है नव किशोर, फुले रहत सुचंद.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (35)