वृन्दाविपिन प्रणाम करि
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 84 of 268
पत्र फूल फल लता प्रति, रहत रसिक पिय चाहि।
नवल कुँवरि दृग छटा जल, तिहि करि सींचे आहि॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (36)
बेल के पत्ते फलों से भरे होते हैं, मीठे और स्वादिष्ट रहते हैं। नवल कुंवारी द्रिग छटा जल, तिहि कारी सींचे अहि.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (36)