प्रेम के खिलौना दोउ खेलत है प्रेम-खेल,
Bayalis Leela — श्री ध्रुवदास
Verse 97 of 268
प्रेम के खिलौना दोउ खेलत है प्रेम-खेल,
प्रेम-फूल फूलनि सौं प्रेम-सेज रची है। [1]
प्रेम ही की चितवनि मुसिकनि प्रेम ही की,
प्रेम रँगी बात करैं प्रेम-केलि मची है॥ [2]
प्रेम के तरंगनि में प्रीतम परे हैं दोऊ,
प्रेम प्यार-भार प्यारी पिय-हिय लची है। [3]
'हित ध्रुव' प्रेम भरी प्यारी सखी देखैं खरी,
हित-चितवनि छवि आनि उर सची है॥ [4]
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, श्रृंगार शत 3 (40)
दोनों प्रेम का खिलौना खेलते हैं, प्रेम-भरी फुलानी ने सौ प्रेम-संत रचे हैं। [1] प्यार की चेतावनी प्यार का संगीत है, प्यार में प्यार के रंग-बिरंगे शब्द सुनाई देते हैं... [2] प्यार की लहरों में, जोड़े से परे प्यार है, प्यार प्यारा है, प्यारा पिया-है लाची है। [3] 'मारो खम्भे पर' प्रेम से भरे प्रिय मित्र, सत्य को देखो, शुभ-चेतावनी छवि और सत्य तुम्हारा है... [4] - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, शृंगार शत 3 (40)