ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 47 of 135

मैं बोले मारी गई, देखौ अजया आँत। पीजन लगि लागी कुटन, तब तै बोलै ताँत॥ - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (22) मैंने कहा मारी, अजय का अंत देखो। पिगजं लागी लागी कुतां, तब तै बोलाई तन.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की वाणी, अन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (22)
कोउ सुकिया कोउ परकियामाया कौं सब जग भजै