भगवत रसिक जी की वाणी
Bhagwat Rasik Vani
श्री भगवत रसिक · 135 verses · Braj
- 1. जोगी ज्ञानी कर्मठी
- 2. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 3. जगत में पैसन ही की माँड
- 4. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 5. नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं
- 6. रसिकबर रसिक रसीलौ रसिया
- 7. जहाँ कृष्ण राधा तहाँ, जहँ राधा तहँ कृष्ण
- 8. जमुना जल विमलत जुगल किशोर
- 9. नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं
- 10. सब सुख सदन बदन तुव राधे
- 11. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 12. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 13. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 14. नित ही प्रति देखि-देखि गुन गाऊँ
- 15. तुब मुख नैन कमल अली मेरे
- 16. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 17. नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं
- 18. नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं
- 19. वन्दत प्रिया पाद जल जात
- 20. बेगम अगम निगम कहैं
- 21. नवरस नित्य बिहार में नागर जानत नित्त
- 22. नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं
- 23. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 24. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 25. नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं
- 26. नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं
- 27. नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं
- 28. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 29. दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर
- 30. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 31. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 32. दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर
- 33. दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर
- 34. दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर
- 35. दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर
- 36. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 37. समन
- 38. माया कौं सब जग भजै
- 39. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 40. पाँयन परि बिनती करै
- 41. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 42. माया कौं सब जग भजै
- 43. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 44. आज तो छबीली राधे रसभरी डोलहीं
- 45. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 46. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 47. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 48. माया कौं सब जग भजै
- 49. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 50. माया कौं सब जग भजै
- 51. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 52. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 53. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 54. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 55. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 56. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 57. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 58. माया कौं सब जग भजै
- 59. बलि जैहौं श्रीरसिकचारज
- 60. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 61. नमो नमो श्री बृंदावनचंद
- 62. भानुनन्दिनी मो तन हेरो
- 63. जै जै रसिक रवनी रवन। रूप गुन लवन्य प्रभुता प्रेम पूरन भवन॥
- 64. माया कौं सब जग भजै
- 65. प्रथम दरस गोविंद रूप के प्रानपियारे
- 66. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 67. माया कौं सब जग भजै
- 68. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 69. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 70. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 71. दुख सुख भुगतै देह, नहिं कछु संक है।
- 72. पौढे ललित लतानि तरै
- 73. आज तो छबीली राधे रसभरी डोलहीं
- 74. पाँयन परि बिनती करै
- 75. मेरी अलक लडी अलबेली
- 76. नाचत दोउ रहस में रँग-भीनैं
- 77. पाँयन परि बिनती करै
- 78. सुरतरु कामधेनु, चिंतामणि बारि दिये देव दानी
- 79. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 80. पाँयन परि बिनती करै
- 81. नवधा भक्ति निमित्त लै, जे सेबत अवतार।
- 82. नहिं निर्गुन सर्गुन नहीं
- 83. पाँयन परि बिनती करै
- 84. पाँयन परि बिनती करै
- 85. कोक कला संगीत लाल कौं
- 86. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 87. अद्भुत रस की खानि, सदा सुखदानि बिहारिनि रानी
- 88. बानी बीजक बस्तु कौ बीजक बस्तु न होइ
- 89. माया कौं सब जग भजै
- 90. भगवत रसिक मनाय लाडिली
- 91. भगवत रसिक रसिक की बातें
- 92. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 93. भगवत रसिक उदार स्वामिनी, दैहैं सर्बसु छोरी
- 94. परिचय :
- 95. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 96. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 97. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 98. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 99. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 100. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 101. माया कौं सब जग भजै
- 102. जहाँ कृष्ण राधा तहाँ, जहँ राधा तहँ कृष्ण
- 103. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 104. आज तो छबीली राधे रसभरी डोलहीं
- 105. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 106. जासौं सपरस चाहिए
- 107. आज तो छबीली राधे रसभरी डोलहीं
- 108. जयति नव नागरी, रूप गुन आगरी
- 109. दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर
- 110. जोगी ज्ञानी कर्मठी
- 111. मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी
- 112. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 113. कोउ सुकिया कोउ परकिया
- 114. कुंज बिहारिनि लाडिली, कुंजबिहारी लाल।
- 115. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 116. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 117. लखी जिन लाल की मुसक्यान ।
- 118. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 119. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 120. नैननि देखीं और नहीं, श्रवण सुने नहीं और ।
- 121. पाँयन परि बिनती करै
- 122. नित मेरौ लालन नित ही लली
- 123. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 124. परस्पर दोउ चकोर, दोउ चंदा
- 125. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 126. पिय प्यारी के संग रहै
- 127. मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी
- 128. कुंज महल रंग हो हो होरी
- 129. सब ऐश्वर्य छिपाइ पाइँ परि
- 130. मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी
- 131. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 132. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 133. ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन
- 134. चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
- 135. यह सुख निरखि सखी नित प्रमुदित