दुर्लभ वृंदा-विपिन है, राख्यौ सब तें गोइ

Bhajan Shata — श्री ध्रुवदास

Verse 3 of 3

दुर्लभ वृंदा-विपिन है, राख्यौ सब तें गोइ। तेहि ठाँ पावै रहन क्यौं, भाग-हीन जो होइ॥ - श्री ध्रुवदास, भजन शत (73) वृन्दा-विपिन दुर्लभ हैं, राख्यौ सब ते गोई। मैं उस स्थान पर क्यों रहूं, भाग जाऊं, चाहे कुछ भी हो जाए.. - श्री ध्रुवदास, भजन शत (73)
दुर्लभ वृंदा-विपिन है, राख्यौ सब तें गोइ