दुर्लभ वृंदा-विपिन है, राख्यौ सब तें गोइ

Bhajan Shata — श्री ध्रुवदास

Verse 2 of 3

धावत वृंदा विपिन तजि, जे जन आन विचारि। अति ही दुर्लभ ठौर यह, तातें कढ़ियत मारि॥ - श्री ध्रुवदास, भजन शत (72) धवत वृंदा विपीन तजि, जे जन अन विचारी। अति दुर्लभ थोर यः, तातें हार्दिक मारी.. - श्री ध्रुवदास, भजन शत (72)
दुर्लभ वृंदा-विपिन है, राख्यौ सब तें गोइदुर्लभ वृंदा-विपिन है, राख्यौ सब तें गोइ