सरद उज्यारी रास रच्यौ पिय-प्यारी

Bhakti Ras Bodhini — श्री नंद दास

Verse 1 of 9

(कवित्त) सरद उज्यारी, रास रच्यौ पिय-प्यारी, तामैं रंग चढ़यौ भारी, कैसै कहिकै सुनाइये। [1] प्रिया अति गति लई, बीजुरी सी कौंधि गई, चकचौंधी भई, छवि मंडल में छाइये॥ [2] नूपुर सो टूटि परयौ, मन अरबरयौ भयौ, तोरि कै जनेऊ बाँध्यौ वाही भाँति भाइये। [3] सकल समाज में यौं कह्यौ - 'आज काम आयौ, ढोयौ हौ जनम', ताकी बात जिय आइये॥ [4] - श्री प्रियादास, भक्ति रस बोधिनी (371) (कविता) सरद उज्यारी, रस रचयौ पिया-प्यारी, तमाई रंग पढ़ायौ भारी, कैसै कहिकै सुनायी। [1] प्रिया अति तेजस्वी है, गहना सी चमकती है, जगमगाती है भाई, परदे पर छवि है.. [2] नूपुर है टूटा हुआ पराया, मन तुमसे डरता है, तुम तोरी के जनेऊ से डरती हो. [3] सारे समाज में ऐसा कुछ कहो - 'आज काम आयु, धौ हौ जनम', ताकि बात में जान आ जाए.. [4] - श्री प्रियादास, भक्ति रस बोधिनी (371)
जह नग खग मृग लता कुंज