जह नग खग मृग लता कुंज

Bhakti Ras Bodhini — श्री नंद दास

Verse 2 of 9

अस अद्भुत गोपाल लाल, सब काल बसत जहँ। याहि तें वैकुंठ विभव, कुंठित लागत तहँ॥ - श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (37) कमाल है गोपाल लाल, कल सब ठीक हो जायेगा। याहि तेन वैकुण्ठ विभव, कुंथित लगत तहां.. - श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रस पंचाध्यायी, श्री वृन्दावन विवरण (37)
सरद उज्यारी रास रच्यौ पिय-प्यारीजह नग खग मृग लता कुंज