जह नग खग मृग लता कुंज

Bhakti Ras Bodhini — श्री नंद दास

Verse 5 of 9

मोहन अद्भुत रूप कहि न आवत छबि ताकी। अखिल खण्ड व्यापी जु ब्रह्म आभा है जाकी॥ - श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (34) ताकि मोहन का अद्भुत रूप सामने आ सके. ब्रह्मा की आभा सम्पूर्ण विश्व में विद्यमान है.. - श्री नन्द दास, नन्द दास ग्रन्थावली, रस पंचाध्यायी, श्री वृन्दावन विवरण (34)
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