जह नग खग मृग लता कुंज

Bhakti Ras Bodhini — श्री नंद दास

Verse 6 of 9

श्री अनंत महिमा अनंत, को वरनि सके कवि। संकर्षन सो कछुक कही, श्रीमुख जाकी छवि॥ - श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (22) श्री अनंत महिमा अनंत, पसंद के कवि। संकर्षण सो कचुक कहहिं, श्रीमुख जाकी छवि।।- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रस पंचाध्यायी, श्री वृन्दावन वर्णन (22)
जह नग खग मृग लता कुंजजह नग खग मृग लता कुंज