जह नग खग मृग लता कुंज
Bhakti Ras Bodhini — श्री नंद दास
Verse 8 of 9
या बन की वर-बानिक, या वन ही बनि आवै।
सेस महेस सुरेस गनेस, न पारहि पावै॥
- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (24)
या तीर की दुल्हन, या तीर ही अवा बन गया। सेस महेस सुरे गुनेस, एन परहि पावै.. - श्री एनएनडी दास, एनएनडी दास ग्रंथावली, रस पंचाध्यायी, श्री वृन्दावन विवरण (24)