जह नग खग मृग लता कुंज

Bhakti Ras Bodhini — श्री नंद दास

Verse 7 of 9

श्रीवृन्दाबन चिद्घन, कछु छबि वरनि न जाई। कृष्ण ललित लीला के काज, गहि रह्यो जड़ताई॥ - श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (17) श्री वृन्दावन चिदघन, छवि न चित्रित होय। कृष्ण की सुन्दर लीलाओं के कारणों की जड़ें बहुत गहरी हैं.. - श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रस पंचाध्यायी, श्री वृन्दावन विवरण (17)
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