जय जय भानुकुंवरि जय राधा अशरण शरण
Bihar Chndrika — श्री किशोरी अलि
Verse 5 of 5
श्री हरिवंसी श्री हरिदासी, सर्वोपरि रसरासी।
विट्ठलविपुल व्यास ध्रुव, नागरीदास बिहारिनी दासी॥
- श्री किशोरी अलि, सार चंद्रिका
श्री हरिवंश श्री हरिदासि परम रसरसि। विट्ठलविपुल व्यास ध्रुव, नागरीदास बिहारिणी दासी.. - श्री किशोरी अली, सर चंद्रिका