मेरी भववाधा हरौ
Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल
Verse 20 of 20
मेरी भववाधा हरौ, राधा नागरि सोय।
जा तन की झाँई परे, स्याम हरित दुति होय॥
- श्रीमहाकवी श्री बिहारी लाल, मंगलाचरण, बिहारी सतसई (1)
हरो मेरे प्रिय, राधा नगरी सोई। देह के भान से परे हो जाओ, जग हरा-भरा हो जाए.. - श्री महाकवि श्री बिहारी लाल, मंगलाचरण, बिहारी सतसई (1)