किती न गोकुल कुल-बधू
Bihari Satsai — श्री बिहारी लाल
Verse 19 of 20
या अनुरागी चित्त की, गति नहिं जाने कोय।
ज्यौं ज्यौं बूढ़ै श्याम रंग, त्यौं त्यौं उज्ज्वल होय॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई
या प्रेमी मन की गति, कोई नहीं जानता। जैसे-जैसे बुध अंधकारमय होता है, आप उज्ज्वल होते जाते हैं.. - श्री महाकवि बिहारी लाल, बिहारी सतसई जिस हृदय में श्यामसुंदर का प्रेम उमड़ता है, उसकी गति को कोई नहीं समझ सकता। काला जितना गहरा होता जाता है, जीवन उतना ही उज्जवल होता जाता है।