नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 35 of 131
नांमी नांम न भावई, तन-मन-मनसा प्राँन।
आसा दासि बिहार की, यों बसि रसिक निदाँन॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (132)
नानामि न नो भवै, तन-मन-मन जीवन। आसा दासी बिहार की, योन बसि रसिक निदान.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत के मित्र (132)