बिहारिन देव जी की वाणी

Biharin Dev Vani

श्री बिहारिन देव · 131 verses · Braj

  1. 1. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  2. 2. Kou Vidya Vidhi Ved Bandhyau Bal
  3. 3. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  4. 4. हाँ, श्री बिहारिन देव जू के शब्द, रस के छंद (20) मेरी स्वामिनी श्री रा
  5. 5. रसिकवर रसिकनी रस रासि
  6. 6. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  7. 7. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  8. 8. रहैं अंग संग अनंग हरैं मनु
  9. 9. देस विदेश भिखारिया, जहाँ जाइ तहाँ भीख।
  10. 10. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  11. 11. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  12. 12. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  13. 13. नामी नाम न भावई
  14. 14. रसिकवर रसिकनी रस रासि
  15. 15. सुनि मन मधुकर ज्ञान सिखाऊँ।
  16. 16. तीरथ सकल लोक बंकुण्ठ तैं
  17. 17. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  18. 18. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  19. 19. अष्ट सिद्धि, नव निद्धि मुक्ति पद दें बौरावत दीख।
  20. 20. रसिकवर रसिकनी रस रासि
  21. 21. बारक श्रीहरिदास विलोकत
  22. 22. नामी नाम न भावई
  23. 23. सुनि अहंकार भलौ न भिया।
  24. 24. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  25. 25. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  26. 26. स्याम सब ही के जिय की जानत हैं।
  27. 27. संग न अब काहू कौ कीजै।
  28. 28. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  29. 29. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  30. 30. उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
  31. 31. हरि मोहिं यों अपनाय लियौ।
  32. 32. नामी नाम न भावई
  33. 33. जब तें प्रभुहिं नवायो माथ।
  34. 34. नामी नाम न भावई
  35. 35. नामी नाम न भावई
  36. 36. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  37. 37. नामी नाम न भावई
  38. 38. सब ही संत हैं रस भरे
  39. 39. नामी नाम न भावई
  40. 40. रुचे मोहिं ब्रजबासिन के टूक।
  41. 41. मेरे विषै विसन वर वाम
  42. 42. नामी नाम न भावई
  43. 43. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  44. 44. मेरे विषै विसन वर वाम
  45. 45. प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ
  46. 46. मेरौ मन श्रीवृन्दावन अटक्यौ।
  47. 47. प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ
  48. 48. नामी नाम न भावई
  49. 49. रसिकवर रसिकनी रस रासि
  50. 50. मेरो मन एक ही ठौर भलौ।
  51. 51. प्रीति न भली भजन बिन और।
  52. 52. कहों री जो कहिबे की होइ
  53. 53. नामी नाम न भावई
  54. 54. नामी नाम न भावई
  55. 55. नामी नाम न भावई
  56. 56. नामी नाम न भावई
  57. 57. नामी नाम न भावई
  58. 58. नामी नाम न भावई
  59. 59. श्री बिहारी दास विहार कौं, लक्ष्मीपति ललचाई।
  60. 60. नामी नाम न भावई
  61. 61. नामी नाम न भावई
  62. 62. पंडित या रस तें बचे, ज्यौं बिझुकै मृग रोझ।
  63. 63. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  64. 64. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  65. 65. नामी नाम न भावई
  66. 66. नामी नाम न भावई
  67. 67. नामी नाम न भावई
  68. 68. बहुत से लोग जीवन भर सपरस और अपरस, या बाहरी प्रथाओं और अनुष्ठानों की धा
  69. 69. नामी नाम न भावई
  70. 70. नामी नाम न भावई
  71. 71. नामी नाम न भावई
  72. 72. नामी नाम न भावई
  73. 73. नामी नाम न भावई
  74. 74. नामी नाम न भावई
  75. 75. नामी नाम न भावई
  76. 76. नामी नाम न भावई
  77. 77. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  78. 78. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  79. 79. नामी नाम न भावई
  80. 80. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  81. 81. नामी नाम न भावई
  82. 82. नामी नाम न भावई
  83. 83. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  84. 84. नामी नाम न भावई
  85. 85. नामी नाम न भावई
  86. 86. नामी नाम न भावई
  87. 87. प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ
  88. 88. नामी नाम न भावई
  89. 89. बसीवो श्री वृन्दावन को नीकौ
  90. 90. भाइ बिना भटकट फिरे, परमार्थ व्यौहार।
  91. 91. भक्ति भाव विस्वास न उपजे
  92. 92. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
  93. 93. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
  94. 94. साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग
  95. 95. मोतिन के बोरे नहीं हंसन की नहि पांत
  96. 96. नामी नाम न भावई
  97. 97. जै श्रीवृन्दावन नव निकुंज में संतत सहज बिराजत जोरी ।
  98. 98. मेरे विषै विसन वर वाम
  99. 99. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
  100. 100. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
  101. 101. “ किये रहै एैंड बिहारी हूँ सौं, हम बेपरवाह विहारिनि के । ”
  102. 102. कोऊ मदमाते भांग के, कोउ अमल अफीम,
  103. 103. मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी
  104. 104. नामी नाम न भावई
  105. 105. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
  106. 106. नामी नाम न भावई
  107. 107. मन मेरे भज ले श्री कुंजबिहारी
  108. 108. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
  109. 109. मेरे विषै विसन वर वाम
  110. 110. मेरौ मन श्री वृन्दावन अटक्यो,
  111. 111. प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ
  112. 112. नवल वृन्दावन नवल बसन्त
  113. 113. नित्य बिहारिनि दासी कहत श्यामा के रस बस,
  114. 114. प्यारी जू मोकों कृपा करो
  115. 115. प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ
  116. 116. नामी नाम न भावई
  117. 117. नामी नाम न भावई
  118. 118. साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग
  119. 119. सब ठाकुर कौ ठाकुर हरि, ता ठाकुर की ठाकुर ठकुराँइनि॥
  120. 120. साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग
  121. 121. नामी नाम न भावई
  122. 122. श्रीबिहारिनदास को यह बिसन राधा नाम हृदय धरि वसि रहैं वृन्दावन ।
  123. 123. साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग
  124. 124. श्रीवृन्दावन निधि सब सुख धांम। [1]
  125. 125. नामी नाम न भावई
  126. 126. श्रीकुंजबिहारी सर्वसु सार।
  127. 127. स्वर्ग नर्क की आस न त्रास ।
  128. 128. ता व्रज के आवरण सुनि गोपी
  129. 129. रसिकवर रसिकनी रस रासि
  130. 130. नामी नाम न भावई
  131. 131. जोरी अद्भुत आज बनी