नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 74 of 131

कोऊ नेष्ठा नाम की, कोऊ नामी नेम। कोऊ रस बस रसिक के, कोऊ लाड़े प्रेम॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (375) क्वो नेष्ठा नाम की, क्वो नामी नाम। बस रसिक में कितना रस है, कितना प्रेम दर्शाया है.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत मित्र (375)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई