नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 76 of 131

मन मनसा आसा मगन, तन की कछु न सम्हार। श्रीबिहारिदास नामु न कहै, निरखै नित्य विहार॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (446) मन इतना प्रसन्न हो जाता है कि शरीर में कोई कष्ट नहीं होता। श्री बिहारीदास नामु न कहाय, निरखै नित्य विहार.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (446)
नामी नाम न भावईमेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी