केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 16 of 77
मानक महल में बिराजैं राज राजेस्वरी,
चार दस लोकन की उपमा लजानी की। [1]
आस पास दासी खासी करत खवासी केती,
कोऊ जलदान इत्र दान पानदानी की॥ [2]
'लाल बलबीर' द्वार भारती भमानी रानी,
अस्तुति सुनावैं हरषावैं वेद बानी की। [3]
केती सुखदानी देवरानी यहाँ आय आय,
आरती उतार्यौ करैं राधे महारानी की॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (8)
माणक महल में बिरजैन राज राजेश्वरी, चार दास लोकन की उपमा लाजानी। [1] अस पस दासि काशी करत खवासी केती, कुओ जल दान अन्य दान पंडनि की।।[2] 'लाल बलबीर' भारती भामनि रानी, अस्तुति सुनवैं हरषवैं वेद बानी की। (8)