प्यारी जू तिहारे पद पंकज की बलिहारी

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 18 of 77

(कवित्त) प्यारी जू तिहारे पद पंकज की बलिहारी, सदाँ ही बिहारी लाल मन ते न टारै हैं। [1] वे हरत कुसुम पराग तबै लागैं जबै हेर, अलबेले पीत पट की सों झारै हैं॥ [2] जावक बनाय चित्र सुखमा विचित्र हेर, लूटत मयूर पिच्छ प्रान धन वारै हैं। [3] हित ध्रुव रस यह सबन तें दुर्लभ है, रसिक सु ‘बलबीर’ दासी उर धारै हैं॥ [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, विप्रलब्धा (9) (कविता) प्यारी जू तिहारे पद पंकज की बलिहारी, सदन ही बिहारी लाल मन ते न तराई। [1]. [3] हित ध्रुव रस, ये सबन दास दुर्लभ, रसिक सु 'बलबीरा' दासी उर धरै हैं.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, विप्रलब्धा (9)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं