केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 19 of 77
तजो गेह सुख देह के, और जगत के फंद।
जुगल चरन सों प्रीति कर, बस वृंदावन चंद॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (9)
पिसा हुआ गेहूँ, शरीर का सुख, और संसार का जाल। जुगल चरण पुत्र प्रीति कर, बस वृन्दावन चंद.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन शतक (9)