केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 3 of 77

जय जय श्रीराधारमन, जय जय श्रीसुखरास। जय जय रसिकन प्राण धन, मम उर करौ निवास॥ - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, षड्ऋतु शतक, दोहा (1) जय जय श्री राधारमण, जय जय श्री शुक्ररास। जय जय रसिकन प्राण धन, मम उर करो निवास.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, षड्रितु शतक, दोहा (1)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं