केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 4 of 77
लोक चतुर्दस मुकटमणि, सदाँ सर्व सुखकंद।
श्री वृषभानुकुमारि कौ, श्री वृंदावन चंद॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृंदावन अष्टक (1)
लोक चतुर्दस मुक्तामणि, सदन सर्व सुखखंड। श्री वृषभानुकुमारी कौ, श्री वृन्दावन छन्द.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृन्दावन अष्टक (1)