केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 54 of 77

कासी औ प्रयाग द्वारावती कौं निहार आये, ब्रज माँहि आयौ जब आयबौ कहा रह्यौ। [1] गंगा सिन्धु सरस्वती सरजू में न्हाय आयौ, जमुना में न्हायौ जब न्हायबो कहा रह्यौ॥ [2] 'लाल बलबीर' ब्रजराज की रंगीली छबि, हिये माँहि लायो जब लायबो कहा रह्यौ। [3] प्रभु प्रसाद पायो सीस संतन कूँ नायो, श्रीवृन्दावन पायो जब पायबो कहा रह्यौ॥ [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (64) तुम किसकी ओर देख रहे हो, काशी और प्रयाग द्वारावती, जब ब्रज ही तुम्हारी मंजिल नहीं है, तो तुम कहाँ रहो? [1] सिन्धु सरस्वती सरजू में नहाये तो गंगा, जमुना में नहाये तो कहाँ जाती है? [2] 'लाल बलबीर' रंगबिरंगी छवि है ब्रजरज की, जब नहाओगे यमुना में, कहाँ होगे तुम। [3] प्रभु प्रसाद पायो सीस संतन कुन नायो, श्री वृन्दावन पायो जब पायो कहाँ रहयौ.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन शतक (64)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं