केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 65 of 77

अति मलीन मति हीन, दीन तुम्हारी सरन हौं श्यामा। परम प्रबीन, मोहि निकुंज बसाइये॥ - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, राधा शतक (4) हे परम विनम्र माँ, मैं तुम्हारी शरण लेता हूँ, श्यामा। परम प्रबीन, मोहि निकुंज बसै.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, राधा शतक (4)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं