केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 66 of 77
बाबा बनखंडी महादेव जग जाहर हैं,
ब्यास जू कौ घेरौ सो अनूप छबि छायौ है। [1]
चारों ओर सदन बने हैं लाल लाड़ली के,
चन्द ते दुचन्द तेज ऐसौ दरसायौ है॥ [2]
सदा व्रजवासी रूप माधुरी निहारौ करें,
और सौं न काम स्यामा स्याम गुन गायौ है। [3]
'लाल बलबीर' नाम लै लै सब टेरत हैं,
राधिका कृपा तें बास वृन्दावन पायौ है॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, पक्षी बंध सवैया (5)
बाबा बनखंडी महादेव हैं जगत के विष, उनसे घिरा है ब्यास की अनुपम छवि। [1] चारों घर लाल प्रेम के बने हैं, बारंबार जगमगाते सौ दर्स्य हैं.. [2] व्रज के वासी होकर, सदा देखो माधुरी, काम के गुण सौ हैं। [3] 'लाल बलबीर' नाम तैर रहा है, राधा की कृपा तो बस वृन्दावन का पान है.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, पक्षी बंध सवैया (5)