कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 1 of 229
अद्भुत रुचि सखि प्रेम की, सहज परस्पर होय।
जैसें एकहि रंग सौं, भरिये सीसी दोय॥
- ब्रज के दोहे
मित्र प्रेम, अद्भुत पारस्परिक हित। एक ही रंग दिखे तो दोहे से भर दो.. -ब्रज के दोहे
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 1 of 229