कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 2 of 229
अहा कहा रसमय रच्यौ, द्वै अक्षर कौ नाम।
वंशी की जीवनि यहै, मंत्र परम अभिराम॥
- ब्रज के दोहे
अहा, आपने रसायम की रचना कहां की, आप दो अक्षरों का प्रयोग क्यों करते हैं? वंशी की जीवनी यहाँ है, मंत्र परम अभिराम.. -ब्रज के दोहे