कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 110 of 229

कूल कलिंदी नीप तर, सोहत अति अभिराम। यह छबि मेरे मन बसो, निसि दिन स्यामा स्याम॥ - ब्रज के दोहे कुल कालिंदी निप तर, सोहत अति अभिराम। यह छवि मेरे मन में बसती है, हर दिन, हर दिन, हर दिन.. - braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की