कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 117 of 229
लटसम्हार प्रिय नागरी, कहा भयोहै तोहि।
तेरी लट नागिन भई, डसा चहत है मोहिं॥
- ब्रज के दोहे
लतास्महर प्रिय नगर, तुमको कहाँ भय? मोहिं मैं तेरी दीवानी हूं नागिन भाई, मैं भी यही चाहती हूं.. -ब्रज के दोहे