कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 118 of 229
महली की गति महली जानै, कहा जानै बाहर वारौ।
नृप की रहन-सहन कहा जानै, भेड़ चरावन हारौ॥
- ब्रज के दोहे
महल की गति जानें, जानें बाहर कहां है? जंगली चरागाहों और चरवाहों को कौन जानता है? -ब्रज के दोहे