कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 124 of 229
मस्त रहे अपने मन में, कबहूँ नहि व्यापत लाभ न हानि।
नाम जपे मन ही मन में, मनमोहन सौ नित प्रीत निभानी॥
- ब्रज के दोहे
मन में प्रसन्न रहो, न लाभ, न हानि। मन में जपो नाम मनमोहन, नित्य प्रेम निभाओ.. - braj ke dohe