कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 133 of 229
मोहनी मूर्ति श्याम की, मो मन रही समाय।
ज्यों मेहँदी के पात पै, लाली लखी न जाय॥
- ब्रज के दोहे
श्याम की मनमोहक छवि, समय-समय पर न्यारी। जैसे मेंहदी से होठों पर लाली नहीं लिखी जाती.. -ब्रज के दोहे