कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 136 of 229

मुक्ति भुक्ति सब खोखली, भक्ति भरी रस रंग। मुक्ति अचल जस पोखरी, भक्ति बहै जस गंग॥ - ब्रज के दोहे मोक्ष का प्रसाद सब खोखला है, भक्ति भारी है। मुक्ति अचल जस पोखरी, भक्ति बहाई जस गंग..-ब्रज के दोहे
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की