कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 135 of 229
मुक्त भये मुनि जन कहैं, होय दुखन कौ अन्त।
पै पुनि कहाँ राधा दरस, कहाँ मिलैं पुनि सन्त॥
- ब्रज के दोहे
मुक्त ऋषि कहते हैं, दुख का कोई अंत नहीं है। राधा दरस कहां, संत कहां पाया.. - braj ke dohe