कीच लगी ब्रज खिरक की

Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे

Verse 140 of 229

नैननि सौं नैना मिले, इकटक रहे निहारि। इन अरुझी अँखियान कौं, कौन सकै निरवारि॥ - ब्रज के दोहे सैकड़ों आँखें एक-दूसरे से मिलीं और एक साथ निहारीं। कौन हैं विरक्त नयन, कौन हैं निरावरी.. - braj ke dohe
कीच लगी ब्रज खिरक कीकीच लगी ब्रज खिरक की